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कैसी व्यवस्था - पत्थरों और गाजर घास के बीच हुआ राष्ट्र पर्व, जर्जर भवन गिराने के एक साल बाद भी नए भवन का इंतजार

धराशायी स्कूल में मनाया स्वतंत्रता दिवस,उदासीनता का नतीजा- एक साल बाद भी नहीं बदली स्थिति.

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Yuvraj Pachori

Journalist

August 15, 2026

4 min read

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कैसी व्यवस्था - पत्थरों और गाजर घास के बीच हुआ राष्ट्र पर्व, जर्जर भवन गिराने के एक साल बाद भी नए भवन का इंतजार
लूणदा। जहां शनिवार को पूरे देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के जज्बे के साथ मनाया गया, वहीं लूणदा ग्राम पंचायत के हरियाखेड़ा गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम बदहाल और असुरक्षित परिसर में मनाने की मजबूरी सामने आई। विद्यालय परिसर में जगह-जगह पत्थर और गाजर घास उगी हुई थी। इसी के बीच विद्यालय के शिक्षकों और ग्रामीणों ने राष्ट्र पर्व मनाया। 

जानकारी के अनुसार हरियाखेड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के भवन को करीब एक वर्ष पूर्व जर्जर एवं असुरक्षित घोषित कर धराशायी कर दिया गया था। भवन गिराए जाने के बाद से विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को गांव के ही एक निजी मकान में टीनशेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया जाना था, लेकिन जिस निजी मकान के टीनशेड के नीचे बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहां के मकान मालिक द्वारा कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में विद्यालय प्रशासन के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा और मजबूरी में धराशायी किए गए पुराने विद्यालय परिसर में ही स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित करना पड़ा।  कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे। परिसर में चारों ओर बिखरे पत्थरों, उगी हुई गाजर घास और भवन के मलबे के बीच बच्चों एवं ग्रामीणों ने राष्ट्रध्वज को नमन किया। स्थिति देखकर ग्रामीणों ने विद्यालय भवन की आवश्यकता को लेकर चिंता जताई । 
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उदासीनता का नतीजा- एक साल बाद भी नहीं बदली स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक वर्ष पूर्व जब क्षेत्र के जर्जर विद्यालय भवनों को गिराया गया था, तब नए भवनों के निर्माण के दावे किए गए थे। उम्मीद थी कि जल्द ही बच्चों को सुरक्षित और सुविधायुक्त विद्यालय भवन मिल जाएगा, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी हरियाखेड़ा विद्यालय परिसर से न तो मलबा पूरी तरह हटाया गया और न ही नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस काम शुरू हुआ।  विद्यालय भवन के अभाव में बच्चों की पढ़ाई निजी मकान में संचालित हो रही है। इससे विद्यार्थियों को पर्याप्त शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर स्थानीय स्कूल प्रशासन एवं पीईईओ कार्यालय की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

कई भवनों की घोषणाएं, लेकिन हरियाखेड़ा से सौतेला व्यवहार
क्षेत्र में कई विद्यालयों के लिए भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं चारदीवारी सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणाएं की गई हैं। लूणदा एवं अमरपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लूणदा तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अमरपुरा जागीर में भी कक्षा-कक्ष और चारदीवारी निर्माण के अलावा बडे डोम के निर्माण  लिए विधायक एवं डीएमएफटी मद से स्वीकृतियां होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में भवन निर्माण और सुविधाओं को लेकर काम हो रहा है, तो हरियाखेड़ा के उन विद्यार्थियों की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जो पिछले एक वर्ष से अपने विद्यालय भवन से वंचित हैं। जर्जर भवन गिराए जाने के बाद अब बच्चों के लिए सुरक्षित एवं स्थायी विद्यालय भवन उपलब्ध कराना जरूरी है।

बच्चों के भविष्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि हरियाखेड़ा प्राथमिक विद्यालय के नए भवन निर्माण की प्रक्रिया को शीघ्र शुरू किया जाए। साथ ही पुराने भवन का मलबा हटाकर परिसर की साफ-सफाई कराई जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व को भी यदि बच्चों को पत्थरों और गाजर घास के बीच मनाना पड़े तो यह विद्यालय की स्थिति और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
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